दिल्ली में प्रदूषण का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। AIIMS बुधवार सुबह भी राजधानी के कई इलाकों में घनी और जहरीली धुंध छाई रही। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 300 के पार बना हुआ है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। आनंद विहार, आईटीओ और दिल्ली AIIMS जैसे संवेदनशील इलाकों में हालात और ज्यादा खराब नजर आए।
सुबह-सुबह धुंध ने किया लोगों का हाल बेहाल
बुधवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में दृश्यता काफी कम रही। सड़कों पर चल रहे वाहन धीमी रफ्तार से चलते दिखे और लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। खासतौर पर आईटीओ और आनंद विहार जैसे इलाकों में जहरीली धुंध का असर साफ दिखाई दिया।
CPCB के मुताबिक, आनंद विहार का AQI 341 दर्ज किया गया, जबकि आईटीओ में यह 360 तक पहुंच गया। दिल्ली AIIMS क्षेत्र में भी धुंध बनी रही, जिससे अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों और स्टाफ को परेशानी हुई।
350 के पार पहुंचा कई इलाकों का AQI
CPCB के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली के कई इलाकों में AQI 350 से भी ऊपर दर्ज किया गया है। वजीरपुर, जहांगीरपुरी, नेहरू नगर, रोहिणी और आईटीओ जैसे इलाकों की हवा सबसे ज्यादा खराब रही। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर का प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए।
बता दें कि AQI को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। 0 से 50 के बीच AQI ‘अच्छा’, 51 से 100 ‘संतोषजनक’, 101 से 200 ‘मध्यम’, 201 से 300 ‘खराब’, 301 से 400 ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 ‘गंभीर’ माना जाता है। फिलहाल दिल्ली के ज्यादातर इलाके 300 के ऊपर बने हुए हैं।
कहां कितनी खराब है दिल्ली की हवा, जानें पूरा हाल
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बुधवार सुबह दर्ज AQI इस प्रकार रहा:
अलीपुर – 314
आनंद विहार – 341
अशोक विहार – 350
आया नगर – 272
बवाना – 378
बुराड़ी क्रॉसिंग – 299
सीआरआरआई मथुरा रोड – 297
चांदनी चौक – 328
डीटीयू – 357
डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज – 342
द्वारका सेक्टर-8 – 342
आईजीआई एयरपोर्ट (टी3) – 263
आईएचबीएएस, दिलशाद गार्डन – 247
आईआईटी दिल्ली – 300
आईटीओ – 360
जहांगीरपुरी – 361
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम – 324
लोधी रोड, आईआईटीएम – 289
मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम – 302
मंदिर मार्ग – 257
मुंडका – 370
एनएसआईटी द्वारका – 361
नजफगढ़ – 304
नरेला – 341
नेहरू नगर – 361
नॉर्थ कैंपस, दिल्ली विश्वविद्यालय – 319
ओखला फेज-2 – 338
पटपड़गंज – 331
पंजाबी बाग – 339
पूसा – 365
आर. के. पुरम – 342
रोहिणी – 364
शादिपुर – 343
सिरीफोर्ट – 356
सोनिया विहार – 345
श्री अरविंदो मार्ग – 312
विवेक विहार – 354
वजीरपुर – 360
इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली का शायद ही कोई इलाका ऐसा बचा हो, जहां हवा सांस लेने लायक कही जा सके।
प्रदूषण बना ‘साइलेंट किलर’
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक इस स्तर की खराब हवा में रहना बेहद खतरनाक हो सकता है। प्रदूषण को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर पड़ता है। सांस की बीमारियां, आंखों में जलन, सिरदर्द, दिल से जुड़ी समस्याएं और फेफड़ों पर बुरा असर इसके आम लक्षण हैं।
दिल्ली-NCR ही नहीं, बल्कि आसपास के कई शहरों में भी हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। ऐसे में लोग छुट्टियां मनाने के लिए साफ हवा वाले इलाकों की तलाश कर रहे हैं।
सख्त कदम उठा रही है सरकार
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने पहले ही कई सख्त कदम उठाए हैं। राजधानी में GRAP-IV लागू है, जिसके तहत सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं। हाल ही में सरकार ने ऐलान किया था कि जिन वाहनों के पास पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा।
इसके अलावा, BS-VI मानकों से नीचे के गैर-दिल्ली वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। सरकार का कहना है कि जब तक हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक ये सख्त नियम लागू रहेंगे।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
प्रदूषण को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि AAP सरकार जनता को गुमराह कर रही है, जबकि आम आदमी पार्टी का कहना है कि वह प्रदूषण से निपटने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
आगे क्या?
मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में अगर हवाओं की रफ्तार बढ़ती है तो प्रदूषण से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल हालात चिंताजनक बने हुए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे गैर-जरूरी बाहर निकलने से बचें, मास्क का इस्तेमाल करें और खासकर बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें।
दिल्ली की हवा कब साफ होगी, यह कहना मुश्किल है, लेकिन फिलहाल राजधानी के लोग जहरीली धुंध के बीच जीने को मजबूर हैं।
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